वेद भी भेद न पाए जिनका ऋषि मुनि सब हारे ऐसे श्याम हमारे
वेद भी भेद न पाए जिनका
ऋषि मुनि सब हारे ऐसे श्याम हमारे।।
वेद भी भेद न पाए जिनका
ऋषि मुनि सब हारे
ऐसे श्याम हमारे।।
याद किया जब भी किसी ने
नंगे पाव पधारे ऐसे श्याम हमारे।।
करागर में जाने
गोकल नगरी में आए
वध करने पूतना आई
उसे मार गिरये को।।
नंद भवन में बनती बधाई
गोकुल वाले हरशाये
कैलाश छोड़ भोले जी
दर्शन करने को आए
करके दर्शन मस्त हो गए
शिव शंकर मतवाले
ऐसे श्याम हमारे
बचपन में नटखट कान्हा
कई अद्भुत खेल दिखाये
कभी माखन चोर कहिए
मधुबन में गाये चराये
कभी नाग कालिया को
वो जमुना से दूर भागे
जब मात यशोदा दांती
मुख पे ब्रह्माण्ड दिखाये
जय जय कार की भक्तो ने
गिरवर नख पे धरे
ऐसे श्याम हमारे।।
भारी शाभा में द्रौपदी
कह कर भैया चिल्लयी
लचर सभा में बैठे
पंचो पांडव भाई
वाह आकार चीयर बढ़ाया
मेरे श्याम ने चीर बदायी
गया हर दुशासन पापी
जब लीला अजब दिखायी।।
देर है प्रति अंधा नहीं है
ये बिगड़े काज सांवरे
ऐसे श्याम हमारे
ऐसे श्याम हमारे।।
जब मगर मचा से हाथी
था बुरी तरह से हारा
तब आए छोड़ गरुड़ को
जब हरि का नाम पुकारा।।
प्रह्लाद भक्त के खातिर
नरसिंह का रूप था धारा
ड्योडी पर बैथ कर हरि ने
हिरणकश्यप को फड़ा
और उठा गॉड में अपने भगत को
मां के तरह पुचकारे
ऐसे श्याम हमारे
ऐसे श्याम हमारे
यार सुदामा के घर
जब छाया थी कंगाली
डर डर फिरता था मारा
सब बिक गए सब लोटा थाली
बचपन का यार कन्हैया
यू कहने लगी घरवाली
मुठ्ठी चावल खा केर करो
सारी खुशिया दे डाली
लोक का राज दे दें
भर डाले भंडारे
ऐसे श्याम हमारे।।
जब बर्बरीक ने आकार के
जब शीश का दान दिया था
हे राजपाल मोहन ने
कुछ यू वरदान दिया था
मेरे नाम से पूजा होगी
कलयुग में शीश के दानी
जब तक है चांद सितारे
ओ लक्खा रहेगी अमर कहानी
खाटू में वही आन बेस है
हारे के जो है सहारा
ऐसे श्याम हमारे
वेद भी भेद न पाए जिनका
ऋषि मुनि सब हारे
ऐसे श्याम हमारे
ऐसे श्याम हमारे।।


