तू बिना मिले भी मेरा है
कभी कभी बिना देखे भी, कोई अपना लगने लगता है,
ना उसकी सूरत पता होती है, ना कोई पहचान,
फिर भी दिल उसी को ढूंढता रहता है,
शायद ये कोई रिस्ता नहीं, ये तो एक एहसास है,
जो हर धड़कन में चुपके से बस जाता है,
और जब ये एहसास कान्हा से जुड़ जाए,
तो फिर मिलना जरुरी नहीं रहता,
क्योंकि वो दिल में हीं रहने लगता है।
तू बिना मिले भी मेरा है, कैसा ये रिस्ता तेरा है,
ना देखा तुझे कभी मैंने, फिर भी दिल में तेरा बसेरा है,
ना कोई सूरत तेरी जाने, ना कोई पहचान है,
फिर भी हर धड़कन में, बस तेरा हीं नाम है,
ये कैसी डोर है दिल की, जो तुझसे हीं जुडी है,
बिन बोले हर एक बात, तुझसे हीं तो बनी है,
तू बिना मिले भी मेरा है, कैसा ये रिस्ता तेरा है,
ना देखा तुझे कभी मैंने, फिर भी दिल में तेरा बसेरा है।
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ख्वावों में आ के चुपके से तू मुस्कुरा जाता है,
मेरे हर एक दर्द को अपना बना जाता है,
मैं ढूँढू तुझे जहाँ जहाँ, तू मुझमें हीं मिल जाता है,
ये कैसा नाता है कान्हा, जो हर पल साथ निभाता है,
तू बिना मिले भी मेरा है, कैसा ये रिस्ता तेरा है,
ना देखा तुझे कभी मैंने, फिर भी दिल में तेरा बसेरा है।
जब भी आँखे नम होती है, नाम तेरा याद आता है,
अँधेरे रास्तों में भी तू दीपक बन जाता है,
इस भीड़ भरी दुनियां में, तू हीं अपना लगता है,
तेरे बिना हर एक लम्हा, सूना सूना सा लगता है,
तू बिना मिले भी मेरा है, कैसा ये रिस्ता तेरा है,
ना देखा तुझे कभी मैंने, फिर भी दिल में तेरा बसेरा है।
कान्हा न तू दिखे, ना छू सकूँ,
फिर भी सबसे पास तू हीं है,
ये कैसा रिस्ता है, जो हर धड़कन में बस तू हीं तू है,
तू बिना मिले भी मेरा है, कैसा ये रिस्ता तेरा है,
ना देखा तुझे कभी मैंने, फिर भी दिल में तेरा बसेरा है।
अब ना कोई चाहत बाकी, ना कोई अरमान है,
बस तेरे नाम में हीं, अब मेरी पूरी पहचान है,
जो मिला है आज मुझको, सब तेरी हीं दुआ है,
तू बिना मिले भी मेरा है, यही मेरा खुदा है,
तू बिना मिले भी मेरा है,
तू बिना मिले भी मेरा है, कैसा ये रिस्ता तेरा है,
ना देखा तुझे कभी मैंने, फिर भी दिल में तेरा बसेरा है।
अब समझ आया, तुझे पाने के लिए तुझे देखना जरुरी नहीं था,
तू तो हर उस पल में था, जब मैं अकेला था,
हर उस आंसू में….

