गोपाल बंशी वाले बृज रज बृज बिहारी
गोपाल बंशी वाले बृज रज बृज बिहारी
इतनी विनय हमारी वृंदा विपिन बसा दे।।
गोपाल बंशी वाले बृज रज बृज बिहारी
इतनी विनय हमारी वृंदा विपिन बसा दे।।
कितने डरो पे भटके कितने ही घर बनाये
अब तेरे दर पे आके जाए ना फिर निकले।।
जोड़ी तेरी हमारी पहले रचि विधाता
हो तुम भी रंग के काले
तो हम भी दिल के काले।।
बहुतों को अपना समझ बहुतों के हो लिए हम
अब तेरे बनेंगे अपना हम बनाले।।
राजे तेरी राजा में अपनी बने या बिगड़े
नाचेंगे हम तो नटवर जैसा हम नाचा दे।।
राधे राधे राधे राधे राधे राधे
श्यामा श्यामा श्यामा श्यामा श्यामा।।


