बढ़ते चलो तुम उसी के मुकाम संवारता है जीवन तुम्हारा जहां
बढ़ते चलो तुम उसी के मुकाम
संवारता है जीवन तुम्हारा जहां।।
बढ़ते चलो तुम उसी के मुकाम
सवारता है जीवन तुम्हारा जहां।।
हकीकत तुम्हें गर गवारा नहीं
जिंदगी मिलेगी दोबारा नहीं
होगा ठिकाना तुम्हारा कहा।।
बढ़ते चलो तुम उसी के मुकाम
सावर्त है जीवन तुम्हारा जहां।।
संतो की संगत हमेशा करो
इंसानियत की डगर पे चलो
मुकालिफ हो अपने या रुठे जहां
या रुठे जहां या रुठे जहां।।
बढ़ते चलो तुम उसी के मुकाम
संवारता है जीवन तुम्हारा जहां
जीवन में तुम जगमगते चलो
बुझाते दिलों को जलाते चलो
तुम्हें रोक पाए ना कोई तूफान
बढ़ते चलो तुम उसी के मुकाम
संवारता है जीवन तुम्हारा जहां।।
अनमोल जीवन चलन नेक हो
करो ज्ञान पैदा ना अविवेक हो
आत्मानन्द अमर होंगे तेरे निशान।।
बढ़ते चलो तुम उसी के मुकाम
संवारता है जीवन तुम्हारा जहां
सवारता है जीवन तुम्हारा जहां।।
