ना मैं रहा ना तू रहा
सांस आती रही, सांस जाती रही,
मैं देखता रहा, बस देखता रहा,
ना मैं रहा ना तू रहा,
जो था वही रह गया।
बूँद ने दरिया से कुछ पूछा नहीं,
दरिया ने बूँद को कभी रोका नहीं,
नाम पिघला रूप खोया पर हो नाम ,
कहीं गया नहीं,
ना छह रही ना राह रही,
बस ठहरा सच बन गया।
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जिसे फ़ना कहे वही शून्य है,
जहाँ है चुप हो गया वहीं पूर्ण जाग उठा,
ना साधक हूँ ना साधना, ना लक्ष्य ना पथ का ज्ञान,
जो खोज रहा था जन्मों से, वो खोज खुद ध्यान बन गयी,
ना मैं रहा ना तू रहा, बस हूँ नाम बस हूँ नाम मैं रह गया हूँ।
