कभी बंसी बजा रहा कभी गैइया चारा रहा

  • Kabhi Bansi Baja Raha Kabhi Gauye Chara Raha

कभी बंसी बजा रहा
कभी गैइया चारा रहा
हे मनमोहन लीला दिखा रहा
तू सबके मन को लुभा रहा।।

कभी कृष्णा कभी श्यामा
रे मनमोहन क्या क्या कहा रहा
तू जाने क्या क्या कहा रहा
लीला दिखा रहा
तू सबके मन को लुभा रहा।।

पिता और मा दोनो है
कन्स ने क़ैद में डाले
तूने जब जन्म लिया तो
तू खुद को कैसे बचा रहा।।

मोहनी मूरत वाले
कैसे हो भोले भले
पूतना मारी है तूने
तू कैसे उसको मिटा रहा।।

चोरी चोरी से आना
घरो में च्छूप च्छूप जाना
खाना माखन मान भर के
तू ग्वालो को भी खिला रहा।।

कभी तू गेंद खिलाए
गेंद जमुना में जाए
जमुना सहस्रा फन
तू कैसे उसको नाचा रहा।।

कभी कृष्णा कभी श्यामा
रे मनमोहन क्या क्या कहा रहा
तू जाने क्या क्या कहा रहा
लीला दिखा रहा
तू सबके मन को लुभा रहा।।

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