मेरे ठाकुर जी की सबसे अजब नगरी
मेरे ठाकुर जी की सबसे अजब नगरी
अजब नगरी रे गजब नगरी
मेरे ठाकुर जी की सबसे अजब नगरी।।
मेरे ठाकुर जी की सबसे अजब नगरी
अजब नगरी रे गजब नगरी
मेरे ठाकुर जी की सबसे अजब नगरी।।
सबसे पहले गिरिराज की
दे परिकम्मा प्यारे
मानस गंगा नहाये के पाहुचो
गिरिराज के द्वारे
चढ़ा दूध गिरिवर पे
कट जाए व्याध सागरि
मेरे ठाकुर जी की सबसे अजब नगरी
मेरे ठाकुर जी की सबसे अजब नगरी।।
भक्ति भव से ब्रज की रज
जितने भी लगाए माथे
ठाकुरजी ने उस दुखिया के
दुख पल भर में कटे
सब दुनिया में
ठाकुरजी की महिमा न्यारी
मेरे ठाकुर जी की सबसे अजब नगरी
मेरे ठाकुर जी की सबसे अजब नगरी
नेश गंगवाल ठाकुरजी के
चरणन शीश नवाये।।
देश गंगवाल श्याम प्रभु
की महिमा भगत सुनाये।।
धन्य धन्य ठाकुरजी
जो मेरी बइया पकड़ी।।
मेरे ठाकुर जी की सबसे अजब नगरी
मेरे ठाकुर जी की सबसे अजब नगरी।।

