राम सीता को लखन वन में चले
राम सीता को लखन वन में चले
गम के बादल आस्मा में छा गये
रामजी ने जब सुनाया है वचन
पतिव्रता सीता को लक्ष्मण ले चले
गम के बदल आस्मा में छा गये
राम सीता दो लखन वन में चले
रात में बैठी तब आँसू आ गये
नाथ अब हुंसे जुड़ा हो रहे
क्या ख़ाता मुझसे होई जो
दो प्रिया नैनो से प्यारे हो गये
गम के बदल आस्मा में छा गये
राम सीता दो लखन वन में चले
लिखने वेल ने लिखा जो भाग्या में
आज अपने भी पराए हो गये
गम के बदल आस्मा में छा गये
राम सीता दो लखन वन में चले
