भजन जो प्रभुजी का करते रहोगे
कृपा नाथ बेशक मिलेंगे किसी दिन
जो सत्संग पथ से गुज़रते रहोगे।।
भजन जो प्रभुजी का करते रहोगे
तो संसार सागर से तरते रहोगे।।
चढ़ोगे नज़र में सभी की सदा तुम
जो अभिमान गिरी से उतरते रहोगे।।
भजन जो प्रभुजी का करते रहोगे
तो संसार सागर से तरते रहोगे।।
छलक ही पड़ेगा दया सिंधु का दिल
जो द्रिग बिंदु से रोज भरते रहोगे।।
भजन जो प्रभुजी का करते रहोगे
तो संसार सागर से तरते रहोगे।।

