इच्छाओ का अंत न कोई राम रचा सोही होई

  • Ichhao Ka Ant Na Koi Ram Racha Sohi Hoyi

ये भी करलु वो भी करलु
घर अपना पैसे से भरलू,
ये भी पा लू वो भी पा लू
जीवन के हर गीत को गए लू,
इच्छाओ का अंत न कोई
राम रचा सोही होई।।

ऐसा होये वैसा होये
जाने कैसा कैसा होये
मिले सभी कुछ कुछ न खोये
भाग जगा हो कभी न सोये,
इच्छाओ का अंत न कोई
राम रचा सोही होई।।

अतुलित बल हो अगणित धन हो,
खुशियों से परिपूरित मन हो,
मेहका भगिया का कण कण हो
जीवन इक सूंदर उपवन हो,
इच्छाओ का अंत न कोई
राम रचा सोही होई।।


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