मोहे भायो राम नाम नहीं दूजा कोई नाम
मोहे भायो राम नाम नहीं दूजा कोई नाम,
हुई वनवारी तेरी संवारी न लागे कही जिया,
ओ पिया ओ पिया ओ रे पिया।।
वेरन हो गई मेरी अखियां
मुझको सुहाए न सखियाँ सहेलिया,
माँ तड़पुं दिन रात तुझे ढूँढू सुबह शाम,
हुई वनवारी तेरी संवारी न लागे कही जिया,
ओ पिया ओ पिया ओ रे पिया।।
जनक दुलारी है तुझपे हारी जी
न पाएगी रसियां तुम्हारी
आजा मेरे प्रिये प्राण मेरे परमेश्वर मेरे राम,
हुई वनवारी तेरी संवारी न लागे कही जिया,
ओ पिया ओ पिया ओ रे पिया।।


