अवध में आए है श्री राम जय श्री राम
अवध में आए है श्री राम, अवध मे आये है श्री राम,
संग में लक्ष्मण मात जानकी, जय श्री राम
संग में लक्ष्मण मात जानकी, चरणों में हनुमान,
अवध मे आये है श्री राम, अवध मे आये है श्री राम॥
आज पथराई अखियां ख़ुशी के नीर बहाए,
आज पथराई अखियां ख़ुशी के नीर बहाए,
करके वनवास पूरा मेरे रघुनाथ आए,
चारों दिशाएं झूम झूम के चारों दिशाएं झूम झूम के,
चारों दिशाएं झूम झूम के गा रही मंगल गान,
अवध मे आये है श्री राम,
अवध मे आये है श्री राम ॥
कभी इक टक मैं निहारूं, कभी मैं नज़र उतारूं,
अपनी असुवन धारा से, प्रभु के चरण पखारूँ,
किन शब्दों में अपने मन की, किन शब्दों में अपने मन की,
किन शब्दों में अपने मन की,ख़ुशी करूँ मैं बयान,
अवध मे आये है श्री राम, अवध मे आये है श्री राम॥
आज मुरझाए मन में, फिर से आयी खुशहाली,
आज घर घर में देखो, मन रही जैसे दिवाली,
राम सिया के इस उत्सव का, जय श्री राम
राम सिया के इस उत्सव का, जय श्री राम
राम सिया के इस उत्सव का, ‘रजनी’ करे गुणगान,
अवध मे आये है श्री राम, अवध मे आये है श्री राम ॥
बज रहे ढोल नगाड़े, फूल राहों में बिछे है,
आज ये चाँद सितारें, देखो आँगन में सजे है,
‘सोनू’ आज ये पूरी धरती, लगती स्वर्ग समान,
अवध मे आये है श्री राम, अवध मे आये है श्री राम॥
अवध में आए है श्री राम, अवध मे आये है श्री राम,
संग में लक्ष्मण मात जानकी,
संग में लक्ष्मण मात जानकी,
संग में लक्ष्मण मात जानकी, चरणों में हनुमान,
अवध मे आये है श्री राम,अवध मे आये है श्री राम॥
