जिन राम ना जाना क्या जाना फिर व्यार्थ हुआ आना जाना
राम नाम की लूट है
लूट खातिर लूट
अंत काल पछतायेगा
जब प्राण जाएंगे छूट।।
जिन राम ना जाना क्या जाना
फिर व्यार्थ हुआ आना जाना।।
जिन राम ना जाना क्या जाना
फिर व्यार्थ हुआ आना जाना।।
राजा राम राम सीता राम राम
राजा राम राम सीता राम राम।।
ज्ञान ना समेटे हीरे छोड़े
तन मन केवल जग से जोड़।।
दौड़ रहे विषयो के घोड़े
संयम के ना लगाय कोडे।।
झूठे नातो से क्या पाना
क्या पाना फिर क्या पाना
जिन राम ना जाना क्या जाना
फिर व्यार्थ हुआ आना जाना
राजा राम राम सीता राम राम
राजा राम राम सीता राम राम
राम नाम से प्रीति लागले
हरि चरणो में शीश झुकले
परम सुखद हरि गुन तू गाले।।
सुख दुख का गण क्या गण
क्या गण फिर क्या गण।।
जिन राम ना जाना क्या जाना
फिर व्यार्थ हुआ आना जाना।।
राजा राम राम सीता राम राम
राजा राम राम सीता राम राम।।

