रघुवर को संदेस मेरा बजरंगी पहुचा देना
रघुवर को संदेस
मेरा बजरंगी पहुचा देना
मेरा हाल सुना देना।।
चरणों में रघुवर के
प्रणाम कहकर
के सुनना हाल ये।।
लंका पति रावन
आ साधु बन
बुना है जाल ये।।
हो बिन पानी के मीन
जैसे हूँ यहा समझा देना
मेरा हाल सुना देना।।
रघुवर को संदेस
मेरा बजरंगी पहुचा देना
मेरा हाल सुना देना
सांसो की माला से
प्रभु का यहा सुमिरन
करू दिन रात मैं।।
मेरे लिए रघुवर
तुम क्यो हुए निष्ठुर
कहो क्या बात है।।
क्यो ना सुनी पुकार
मेरी भूलो को बिसरा देना
मेरा हाल सुना देना।।
रघुवर को संदेस
मेरा बजरंगी पहुचा देना
मेरा हाल सुना देना।।
तुम आए हो हनुमान
ऐसा लगा जैसे
कोई अपना साथ है।।
तुम जा रहे हो तो
मेरे लिए दुख के
वही दिन रात है।।
जाकर रघुवर को
ये मेरी चूड़ा मडी
दिखा देना।।
मेरा हाल सुना देना
रघुवर को संदेश
बजरंगी पहुचा देना।।
विश्वश है स्वामी
मेरी विनती पर
जल्द ही आएँगे।।
जो जल्दी ना आए रघुवर
सिया अपनी यहा ना पाएँगे।।
हो ये अंतिम संदेश प्रभु को
ध्यान से बता देना
मेरा हाल सुना देना
रघुवर को संदेश
मेरा बजरंगी पहुचा देना।।
मेरा हाल सुना देना
रघुवर को संदेश
मेरा बजरंगी पहुचा देना।।


