मेरे मन मंदिर में प्रभु तुम
चले तेरी सरकार गिरधर, तुझसे है संसार,
चले तेरी सरकार गिरधर, तुझसे है संसार,
सुनलो इतनी बात प्रभु मेरे मन की,
हरलो न दुख संताप कष्ट मेरे जीवन की-०२
सुनलो मेरी पुकार, आया मैं तेरे द्वार,
जो ना सुनोगे प्रभु, किसको लगाऊं गुहार,
संकट मोचन तुम्हीं हो भगवन, सबके संकट हरते हो,
मेरी बात जो आयी भगवन, फिर क्यों देरी करते हो,
बिगड़ी दशा सुधारो, इस पापी मन की,
हरलो न दुख संताप कष्ट मेरे जीवन की-०२
और इस भजन से भी आनंदित हों : मेरे भगवन दया कीजिये
बोलो जाऊं अब कहां, तू जहां मैं वहां
मैं रहूँगा वहीं, तेरा है मंदिर जहां,
मेरे मन मंदिर में भगवन, तुम हीं तुम बसते हो,
फिर मुझको देने में दर्शन, देरी क्यों करते हो,
कुछ तो कदर करो प्रभु, मेरे अर्चन की,
हरलो न दुख संताप कष्ट मेरे जीवन की-०२
चले तेरी सरकार गिरधर, तुझसे है संसार,
सुनलो इतनी बात प्रभु मेरे मन की,
हरलो न दुख संताप कष्ट मेरे जीवन की-०२
