पतंग उड़ी खाटू के नाम की
मकर संक्रांति आयी रे, खुशियां जग में छायी रे,
डोर थाम ली मैंने तो, अपने बाबा श्याम की।
आज पतंग उड़ी रे मेरी, खाटू के नाम की,
आज पतंग उड़ी रे मेरी, श्याम के नाम की,
नीला गगन है नीला बाना, सारा जग है इनका दीवाना,
भीड़ लगी है खाटू में, दर्शन करने आना,
श्रद्धा की ये चरखी है, डोर बड़ी ये पक्की है,
चरा दी मैंने ये पीछे, दुनिया के तमाम की,
आज पतंग उड़ी रे मेरी, खाटू के नाम की।
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हवा चली है भक्ति वाली,
झूम रही है डाली डाली,
श्याम की कृपा से, घर घर में आती है खुशहाली,
काटो पाप के पेंच सभी, थाम लो बाबा को अभी,
महिमा भारी है मेरे, लख दातार श्याम की,
आज पतंग उड़ी रे मेरी, खाटू के नाम की।
हारा का सहारा लिखकर,
उदा दी मैंने अम्बर पर,
पहुँच गयी है अर्जी मेरी, अब तो सांवरे के दर पर,
हारे का ये साथ निभाए, बिगड़ी सबकी ये बनाये,
जय बोलो रे प्रेम से, शीश के दानी श्याम की,
आज पतंग उड़ी रे मेरी, खाटू के नाम की।


