कान्हा रे
तू मेरे कल में तू आज में है,
तू हीं मेरे सुर में साज में है,
पल भर को कान्हा सुनले मुझे तू,
तू हीं तो मेरी आवाज में है,
उम्मीद तू है तू है सहारा,
तू हीं है मेरा संसार सारा,
टुटा हुआ है मन इस जहां से,
मझधार में हूँ तू हीं किनारा,
दर्शन मैं करना चाहूं,
कैसे तुझे मैं पाऊं,
भक्ति में तेरी मैं जीवन बिताऊं,
होठों पे हरदम मेरे,
है नाम तेरा हाय,
तुझको जो पाऊं तो जग से तर जाऊं…..
और इस भजन को भी देखें: अगर मैं राधा राधा गाऊं
कान्हा रे तू हीं तो बस मेरा है,
और नहीं कोई मेरा यहां है,
कान्हा रे तू हीं तो बस मेरा है,
और नहीं कोई मेरा यहां है,
ओ कांधा आ आ आ…
कन्धा आ आ आ…
कन्धा आ आ आ…
कन्धा आ आ आ…
आ आ आ…

