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ये दुःख ये गम सहूँ कैसे माँ

  • Ye Dukh Ye Gam Sahun Kaise Maa

ये दुःख ये गम सहूँ कैसे माँ, दिल की पीड़ा कहूँ कैसे माँ,
जब भी टुटा हूँ इस दुनिया में, दर पे तेरे हीं आया हूँ माँ,
थाम ले अब हाथ मेरा, तेरे बिना चलूँ कैसे माँ,
दुनिया की राहों में कांटे हीं कांटे मिले, हर मोड़ पे बस दर्द के साये मिले,
अपनों की भीड़ में खुद को तनहा पाया, हर चेहरे के पीछे पराये मिले,
जब भी गिरा हूँ इस जीवन की राहों में, तू हीं बनकर उजाला आयी माँ,
मेरे हर आंसू की कहानी जानकर, ममता से तूने मुझे अपनाया माँ,
ये दुःख ये गम सहूँ कैसे माँ, दिल की पीड़ा कहूँ कैसे माँ,
जब भी टुटा हूँ इस दुनिया में, दर पे तेरे हीं आया हूँ माँ,
थाम ले अब हाथ मेरा, तेरे बिना चलूँ कैसे माँ।

जब रात लम्बी हो जाती हैं, और उम्मीदें भी सो जाती हैं,
जब टूटे सपनो की चुभन से, आँखे भी नम हो जाती हैं,
तब तेरी मूरत सामने आती है, और दिल को सुकून दे जाती है,
तेरे आँचल की छाया मिल जाए, तो हर तकलीफ दूर हो जाती है,
मेरी हर सांस में तेरा हीं नाम रहे, मेरे हर दर्द में तेरा हीं धाम रहे,
अगर गिरूँ तो थाम लेना माँ, मेरे कदमों में बस तेरा हीं धाम रहे,
ये दुःख ये गम सहूँ कैसे माँ, दिल की पीड़ा कहूँ कैसे माँ,
जब भी टुटा हूँ इस दुनिया में, दर पे तेरे हीं आया हूँ माँ,
थाम ले अब हाथ मेरा, तेरे बिना चलूँ कैसे माँ।

और इस भजन को भी देखें: जैसे तू रखे वैसे रह लेंगे माँ

तेरे दरबार से खाली कोई जाता नहीं, माँ तेरी कृपा से कोई रोता नहीं,
जो भी आया है सिर झुकाकर यहाँ, उसका भाग्य फिर कभी सोता नहीं,
मेरी भी नैया भंवर में फँसी हैं माँ, इसे किनारे लगा दो आज,
तेरे नाम का दीप जला रखा है, बस एक बार दिखा दो अपना राज,
मेरी हर सांस में तेरा हीं नाम रहे, मेरी हर दर्द में तेरा हीं धाम रहे,
अगर गिरूँ तो थाम लेना माँ, मेरे कदमों में बस तेरा हीं धाम रहे,
ये दुःख ये गम सहूँ कैसे माँ, दिल की पीड़ा कहूँ कैसे माँ,
जब भी टुटा हूँ इस दुनिया में, दर पे तेरे हीं आया हूँ माँ,
थाम ले अब हाथ मेरा, तेरे बिना चलूँ कैसे माँ।


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