वृन्दावन प्यारो वृन्दावन
श्यामा ह्रदय कमल सो प्रकट्यो-०२
श्याम ह्रदय को भाये,
वृन्दावन प्यारो वृंदावन,
वृन्दावन मेरो वृन्दावन,
वृन्दावन प्यारो वृन्दावन,
वृन्दावन मेरो वृन्दावन।
सब सुख सागर रूप उजागर, रहे वृन्दावन धाम-०२
रूप गोस्वामी प्रकट कियो जहां,
रूप गोस्वामी प्रकट कियो जहां, गोविन्द रूप निधान,
वृन्दावन प्यारो वृंदावन,
वृन्दावन मेरो वृन्दावन,
वृन्दावन प्यारो वृन्दावन,
वृन्दावन मेरो वृन्दावन।
विहरत निश दिन कुञ्ज गलिन में, ब्रज जन मन सुख धाम-०२
मदन मोहन को रूप निरख के,
मदन मोहन को रूप निरख के, संतन वन वन जाए,
वृन्दावन प्यारो वृंदावन,
वृन्दावन मेरो वृन्दावन,
वृन्दावन प्यारो वृन्दावन,
वृन्दावन मेरो वृन्दावन।
गोपी ग्वाल सब हिय उर धारे, प्यारो गोपीनाथ-०२
मधुसूदन जिन कंठ लगायो,
मधुसूदन जिन कंठ लगायो, जहां हो रही जैकार,
वृन्दावन प्यारो वृंदावन,
वृन्दावन मेरो वृन्दावन,
वृन्दावन प्यारो वृन्दावन,
वृन्दावन मेरो वृन्दावन।
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आतुर है हरिवंश पुकारो, श्री राधा राधा नाम-०२
सघन कुञ्ज यमुना तट आयो,
सघन कुञ्ज यमुना तट आयो, श्री राधा बल्लभ लाल,
वृन्दावन प्यारो वृंदावन,
वृन्दावन मेरो वृन्दावन,
वृन्दावन प्यारो वृन्दावन,
वृन्दावन मेरो वृन्दावन।
श्यामा ह्रदय कमल सो प्रकट्यो-०२
रे श्याम ह्रदय को भाये,
वृन्दावन प्यारो वृंदावन,
वृन्दावन मेरो वृन्दावन,
वृन्दावन प्यारो वृन्दावन,
वृन्दावन मेरो वृन्दावन।

