वट सावित्री व्रत बड़ा है पावन
वट सावित्री व्रत बड़ा है पावन-०२
चमके सिन्दूर सदा ये कहे सुहागन-०२
वट सावित्री व्रत बड़ा है पावन-०२
जेठ महीने अमावस में व्रत मुहूर्त शुभ है आये,
स्नानादि करके सब नारी बरगद पूजन जाए,
जेठ महीने अमावस में व्रत मुहूर्त शुभ है आये,
स्नानादि करके सब नारी बरगद पूजन जाए,
इस व्रत से हो सुखमय सभी का जीवन-०२
वट सावित्री व्रत बड़ा है पावन-०२
बांस का पंखा चने का लावा पीले फूल सजा के,
दीप और धुप जलाती सुहागन रोली तिलक लगा के,
बांस का पंखा चने का लावा पीले फूल सजा के,
दीप और धुप जलाती सुहागन रोली तिलक लगा के,
करके श्रृंगार तन पे सजाये आभूषण-०२
वट सावित्री व्रत बड़ा है पावन-०२
साफ़ सफाई कर मंडप बरगद के निचे बनाये,
कथा सावित्री सत्यवान के पंडित पढ़ के सुनाये,
साफ़ सफाई कर मंडप बरगद के निचे बनाये,
कथा सावित्री सत्यवान के पंडित पढ़ के सुनाये,
आगे सावित्री के कैसे हार गए यम-०२
वट सावित्री व्रत बड़ा है पावन-०२
बृक्ष में करके जल अर्पण फिर धागा लपेट सब आये,
सारे सुहागन एक साथ मिल परिक्रमा है लगाए,
बृक्ष में करके जल अर्पण फिर धागा लपेट सब आये,
सारे सुहागन एक साथ मिल परिक्रमा है लगाए,
सदा रहता है प्रेम का अटूट बंधन-०२
वट सावित्री व्रत बड़ा है पावन-०४
