उतारूं गजानन तेरी आरती
मन में बसाकर तेरी मूर्ति-०२
उतारूं गजानन तेरी आरती-०२
बुद्धि ज्ञान के ज्ञाता तुम्हीं हो, बेसहारे का नाता तुम्हीं हो,
मेरी तो हर एक आशा तुम्हीं हो,
मन में बसाकर तेरी मूर्ति-०२
उतारूं गजानन तेरी आरती।
करुणा करो दुःख ये हरो, ज्ञान दो भगवन,
काम क्रोध लोभ भरा, मन किया अर्पण,
करुणा करो दुःख ये हरो, ज्ञान दो भगवन,
काम क्रोध लोभ भरा, मन किया अर्पण,
माया मोह से मुक्ति दिलाओ, अपने चरणों में मुझको बसाओ,
मेरी उम्मीदों का ऐतवार तुम्हीं हो,
कर दो मेरी याचना पूर्ति, उतारूं गजानन तेरी आरती,
मन में बसाकर तेरी मूर्ति, उतारूं गजानन तेरी आरती।
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एकदन्त दयावन्त तुमको हैं नमन, करुणा भरे झील से हैं तेरे ये नयन-०२
अपने भक्तों पर तुम दया करते, रोग दोष मुक्त काय को करते,
खुशियों का गजानन पर्याय तुम्हीं हो,
आँखों में तेरी छवि तैरती, उतारूं गजानन तेरी आरती,
मन में बसाकर तेरी मूर्ति,
मन में बसाकर तेरी मूर्ति, उतारूं गजानन तेरी आरती,
रिद्धि सिद्धि साथ-साथ लेके तुम आये,
उसकी झोली भरते सदा महिमा जो गाये,
रिद्धि सिद्धि साथ-साथ लेके तुम आये,
उसकी झोली भरते सदा महिमा जो गाये,
शब्दों से बखान तेरा क्या करूँ, बस सदा तेरा ध्यान मैं करूँ,
लेखनी और वाणी गणराज तुम्हीं हो,
तेरी छवि मेरा मन मोहती, उतारूं गजानन तेरी आरती,
मन में बसाकर तेरी मूर्ति,
मन में बसाकर तेरी मूर्ति, उतारूं गजानन तेरी आरती।
