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तुम्हें राम कहूँ या विष्णु

  • Tumhein Ram Kahun Ya Vishnu

तुम्हें राम कहूँ या विष्णु, या कहूँ नन्द का लाला,
हर युग में दर्शन देता, मेरा मोहन मुरली वाला,
तुम्हें राम कहूँ या विष्णु, या कहूँ नन्द का लाला,
हर युग में दर्शन देता, मेरा मोहन मुरली वाला।

सतयुग में विष्णु बनकर, तुमने संसार रचाया,
तेरी माया अजब निराली, ना पार किसी ने पाया-०२
तू नारायण कहलाया है, तेरा रूप निराला
हर युग में दर्शन देता, मेरा मोहन मुरली वाला,
तुम्हें राम कहूँ या विष्णु, या कहूँ नन्द का लाला,
हर युग में दर्शन देता, मेरा मोहन मुरली वाला।

श्री राम बने त्रेता में, दशरथ नंदन कहलाये,
चुन चुनकर पापी मारे, असुरों को खोज मिटाये-०२
दिए भक्तों के मनचाहे, प्रभु तू है दीन दयाला,
हर युग में दर्शन देता, मेरा मोहन मुरली वाला,
तुम्हें राम कहूँ या विष्णु, या कहूँ नन्द का लाला,
हर युग में दर्शन देता, मेरा मोहन मुरली वाला।

द्वापर में कृष्ण कन्हैया, मुरलीधर बनकर आये,
महाभारत कुरुक्षेत्र में, गीता का ज्ञान सुनाये-०२
कण-कण के बीच समाये, तेरा रूप है भोला-भाला,
हर युग में दर्शन देता, मेरा मोहन मुरली वाला,
तुम्हें राम कहूँ या विष्णु, या कहूँ नन्द का लाला,
हर युग में दर्शन देता, मेरा मोहन मुरली वाला।

और इस भजन को भी देखें: कितना सुन्दर नाम जपेगा कोई कलियुग में

हारे का सहारा बनकर, कलयुग में लीला दिखाई,
तूने मोर छड़ी है घुमाई, भक्तों की बनी सहाई-०२
चरणों में ध्यान हो मेरा, त्तेरा रूप बड़ा अलबेला,
हर युग में दर्शन देता, मेरा मोहन मुरली वाला,
तुम्हें राम कहूँ या विष्णु, या कहूँ नन्द का लाला,
हर युग में दर्शन देता, मेरा मोहन मुरली वाला।


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