टोली भक्तन की देखो रे सालासर चली
टोली भक्तन की देखो रे सालासर चली
लाल ध्वज बजरंगी की हत्था में थाली।।
जाके बजरंगी बाला रात जगावेंगे
क्या स्वमणी का बजरंगी के रोट चढ़वांगे।।
मुँह मंगा वर पवंगा न आवेंगे खली
लाल ध्वज बजरंगी की हत्था में थाली।।
कश्त नष्ट हो जाते जिसके डार पे जाने से
मनोकामना पूर्णा होवे ज्योत जगाने।।
भक्तो का मन मोहे रे सिंदूर की लाली
लाल ध्वज बजरंगी की हत्था में थाली।।
चैत सुदी पूनम का मेला लागे से भारी
दूर से दूर दर्शन करने आवे नर नारी।।
राजपाल लक्खा की कोई बात नहीं ताली
लाल ध्वज बजरंगी की हत्था में थाली।।
टोली भक्तन की देखो रे सालासर चली
लाल ध्वज बजरंगी की हत्था में थाली।।

