तेरी राम जी से क्या पहचान
तेरी राम जी से क्या पहचान,
तेरी राम जी से क्या पहचान।।
पहले नही देखा कैसे हो भरोसा,
इतना बता हनूमान,
तेरी राम जी से क्या पेहचान,
तेरी राम जी से क्या पहचान।।
कौन सी घड़ी में,
कौन सी जगह पे,
हुई तेरी मुलाकात,
किस कारण से मेरे प्रभु ने,
रखा तुमको साथ,
नर वानर का साथ हुआ कैसे,
कौन सा किया तुमने काम,
तेरी राम जी से क्या पेहचान,
तेरी राम जी से क्या पहचान।।
गढ़ लंका में आया कैसे,
राक्षस है बलवान,
तुमको भेजा पास में मेरे,
आये क्यों नहीं राम,
हाथ कैसे आई इनकी निशानी,
ये है असम्भव काम,
तेरी राम जी से क्या पेहचान,
तेरी राम जी से क्या पहचान।।
करके भरोसा देखा मैंने,
और धोखा खाया,
बात ना मानी लक्ष्मण जी की,
ऐसा दिन है आया,
भूल हुई मुझसे “बनवारी” तबसे,
बिछुड़ गए मेरे राम,
तेरी राम जी से क्या पेहचान,
तेरी राम जी से क्या पहचान।।
पहले नही देखा कैसे हो भरोसा,
इतना बता हनूमान,
तेरी राम जी से क्या पेहचान,
तेरी राम जी से क्या पहचान।।
