तेरी मेरी कुछ सुनी फिर उसकी उसकी कुछ कहि
तेरी मेरी कुछ सुनी
फिर इसकी उसकी कुछ कहि
इसमें बीते सुबह से शाम।।
तेरी मेरी कुछ सुनी
फिर इसकी उसकी कुछ कहि
इसमें बीते सुबह से शाम
भजले मनवा जय सिया राम
जय जय सिया राम जय जय सिया राम।।
सुनता तू है और कहता भी
झूठा जग है ये सारा
भाई बंधु ना मीत कोई
माया का सब ये है फसाना।।
उपदेश तू जो बोले खुद तो
भूला प्रभु का प्यारा नाम
भजले मनवा जय सिया राम
जय जय सिया राम जय जय सिया राम।।
तेरी मेरी कुछ सुनी
फिर इसकी उसकी कुछ कहि।।
भजले मनवा जय सिया राम
जय जय सिया राम
जय जय सिया राम।।
तेरी मेरी कुछ सुनी
फिर इसकी उसकी कुछ कहि।।
माया में कुछ ऐसा उल्झा
जग को ही सब कुछ मन।।
जगत को भी रचने वाले
रामजी को ना जाना।।
जग जरा और करले प्रीति
उनके चरणों में निष्काम।।
भजले मनवा जय सिया राम
जय जय सिया राम जय जय सिया राम।।
तेरी मेरी कुछ सुनी
फिर उसकी उसकी कुछ कहि
इसमें बीते सुबह से शाम।।
भजले मनवा जय सिया राम
जय जय सिया राम जय जय सिया राम।।
बहुत गई अब तो संभल मन
बीती है सुबह से शाम
जाने तन क्या मन भी
साथ देगा देगा हरि का नाम
गाले उनका सुंदर नाम
पाले उनका पवन धाम।।
भजले मनवा उनका पवन नाम
जय जय सिया राम जय जय सिया राम।।
तेरी मेरी कुछ सुनी
फिर इसकी उसकी कुछ कहि
इसमें बीते सुबह और शाम।।
भजले मनवा जय सिया राम
जय जय सिया राम जय जय सिया राम।।
