सियाराम के सारे कष्ट हरे संकट मोचन कहलाए है
सियाराम के सारे कष्ट हरे
संकट मोचन कहलाए है।।
सियाराम के सारे कष्ट हरे
संकट मोचन कहलाए है।।
जब जब श्री राम पे भीड़ पड़ी
बजरंगी दौड़े आए है।।
रावण ने जाल बिच्छाया था
सीता को वो हर लाया था।।
तब एक छलांग में बजरंगी
सौ योजन पार लगाए है।।
जब जब श्री राम पे भीड़ पड़ी
बजरंगी दौड़े आए है।।
लक्षमन व्याकुल हुए पड़े
तब हाथ उठाकर पर्वत को
वो पवन वेग से आए है।।
जब जब श्री राम पे भीड़ पड़ी
बजरंगी दौड़े आए है।।
पाताल में आप पधारे थे
अहिरवाँन को वाहा मारे थे
कंधे पेर बिता के क्षड़ भर में
वो राम लखन को लाए है।।
जब जब श्री राम पे भीड़ पड़ी
बजरंगी दौड़े आए है।।
जब राम नाम नही पाया था
माला को तोड़ गिराया था।।
जग को विश्वाश दिला ही दिए
हर्ष सीना फाड़ दिखाए है।।
जब जब श्री राम पे भीड़ पड़ी
बजरंगी दौड़े आए है।।
राम राम बोलो राम राम
राम राम बोलो राम राम।।
सियाराम के सारे कष्ट हारे
संकट मोचन कहलाए है।।


