श्री हनुमान अमृतवाणी
जो कदम कदम पे रघुवर का
हरपाल ही साथ निभाते हैं
उस भक्त शिरोमणि हनुमान कि
मिहमा आज सुनते हैं
जो कदम कदम पे रघुवर का।।
जय राम सिया राम जय राम सिया राम
जय जय राम जय जय राम।।
दिन पूनम का चैत सुदी
बजरंग बली का जनम हुआ।।
तब वानर राज केसरी के घर
खुशी का संचार हुआ।।
माता अंजनी के लाड कुंवरी
उस रोज़ धारा पर आते हैं।।
उस भक्त शिरोमणि हनुमान कि
मिहमा आज सुनते हैं
जो कदम कदम पे रघुवर का।।
त्रेता युग में श्री राम रूप में
भगवान विष्णुजी अवतार लिया
श्री राम की सेवा करने को
शंकर जी हनुमान बने।।
माता अंजनी की खोख में
वो वायु के रास्ते आते हैं।।
उस भक्त शिरोमणि हनुमान कि
मिहमा आज सुनते हैं
जो कदम कदम पे रघुवर का।।
जय राम सिया राम जय राम सिया राम
जय जय राम जय जय राम।।
शिव कान मार्ग से पवन के द्वार
मां के गर्भ में आए थे।।
हनुमान ने उड़ने की शक्ति
पिता पवन से पाए थे।।
इस करण ही केसरी नंदन
हनुमान पवन पुत्र कहते हैं।।
उस भक्त शिरोमणि हनुमान कि
मिहमा आज सुनते हैं
जो कदम कदम पे रघुवर का।।
बाला पान में हनु समझौता खिलोना
सूरज मुह में ग्रास किया
तब अंधकार में डूबी दुनिया
जग में हाहा कर मचा
देवो की विंति सुनकर के
सूरज को आन छुदते हैं।।
उस भक्त शिरोमणि हनुमान कि
मिहमा आज सुनते हैं
जो कदम कदम पे रघुवर का।।
