सातों जनम में तेरे
सातों जनम में तेरे, साथ रहूंगी ओ गिरधारी,
छोडूंगी ना ये गलियां, ना ये प्रेम की डोरी प्यारी,
नैनों में तू है वसा, साँसों में तेरा वास है,
तू हीं मेरी मुक्ति है मोहन, तू हीं मेरी प्यास है,
कभी यमुना के तट पे बुलाना, कभी मधुवन में आना,
अपनी मुरली की मीठी तान से, मेरा मन हर्षाना,
मैं गोपी बनके नाचूंगी, तुम रास रचाना कान्हा,
बस एक झलक अपनी दिखाकर, मेरा भाग्य जगाना,
सातों जनम में तेरे…
जग की रीतें जग हीं जाने, मैं तो तेरी दीवानी हूँ,
तू है सागर करुणा का, मैं उसकी एक कहानी हूँ,
चाहे दुःख मिले या सुख मिले, तेरे चरणों में ठिकाना हो,
राधा का हर एक जन्म, बस तेरे हीं नाम का तराना हो,
सातों जनम में तेरे, साथ रहूंगी ओ गिरधारी,
छोडूंगी ना ये गलियां, ना ये प्रेम की डोरी प्यारी।
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भूलूँ ना एक पल को तुझे, ऐसा वरदान देना ,
अपने प्रेम की अमृत से, मेरा जीवन भर देना,
हर धड़कन में गूंजे बस कृष्णा, यही मेरी अभिलाषा है,
तुझसे मिलकर हीं पूरी होती, मेरी हर परिभाषा है,
सातों जनम में तेरे, साथ रहूंगी ओ गिरधारी,
छोडूंगी ना ये गलियां, ना ये प्रेम की डोरी प्यारी।
