सखी रे मैने लिया गुरु का नाम मेरा मन भक्ति में लगा
सखी रे मैने लिया गुरु का नाम
मेरा मन भक्ति में लगा।।
मेरा मन भक्ति में लगा
मैने पाप करम सब त्यागा।।
सखी रे मैने लिया गुरु का नाम
मेरा मन भक्ति में लगा।।
मैने लिया गुरु की शरणा
अब विपदा से क्या डरना।।
सखी रे सुलझे काम तमाम
मेरा मन भक्ति में लगा।।
मैने राज समझ में आया
सेवा करना धरम बताया।।
सखी रे मानने मिला गुरु से ज्ञान
मेरा मन भक्ति में लगा।।
मैने फेरी गुरु की माला
किशमत का खुल गया ताला।।
सखी रे मेरी बड़ी जगत में शान
मेरा मन भक्ति में लगा।।
मैने गुरु बना लिया बहाना
यो सुदेश भगत का कहना।।
सखी रे वो बालाजी महाराज
मेरा मन भक्ति में लगा।।
सखी रे मैने लिया गुरु का नाम
मेरा मन भक्ति में लगा।।
