साईं साईं जपते जपते

  • sai sai japte japte

साईं साईं जपते जपते मैं खुद साईं हो जाती हु
साईं से जो सिखा वो तुम्हे बताती हु
साईं साईं जपते जपते मैं खुद साईं हो जाती हु

देना हो तो दीजिये प्रेम दया दान में
पर्ब्दी में पड़ जाता है आदमी घुमान में
सत साईं रटते रटते साईं नाम जपते जपते मैं कमली हो जाती हु
साईं से जो सिखा वो तुम्हे बताती हु
साईं साईं जपते जपते मैं खुद साईं हो जाती हु

इक जगह से आये हो उतरे इक ही घाट पे,
हवा संसार की पट गए धर्म और जात पे
इक ही मालिक सब का इक हिमत बतलाती हु
साईं से जो सिखा वो तुम्हे बताती हु
साईं साईं जपते जपते मैं खुद साईं हो जाती हु

तू भी साईं मैं भी साईं जाने जानन हारा
साईं सागर तू है बूंद रूप वो तुम्हारा,
साईं जी का बन के प्यारा साईं में ही समाती हु
साईं से जो सिखा वो तुम्हे बताती हु
साईं साईं जपते जपते मैं खुद साईं हो जाती हु

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