सांवरा सलोना चितचोर

  • Saanvra Salona Chitchor

वृन्दावन की गलियों में, बजती जो बंसी है,
वही मेरा कान्हा है, वही मेरा किशोर है,
बांकी अदा तिरछी नज़र, जादू का ये शोर है,
सांवरा सलोना मेरा, चितचोर किशोर है,
जय हो…
सांवरा सलोना मेरा, चितचोर किशोर है।

मोर मुकुट माथे तिलक, कानों में कुण्डल साजे,
यमुना के तट पे जब, वो मधुर बंसी बाजे,
पंक्षी चहके गैया थामे, थम जाए पवन की चल,
सुधबुध खोये खड़ा रहे, मेरा मदन गोपाल,
इसकी तान पे नाचती, ये दुनिया सारी,
वृन्दावन की गलियों में, बजती जो बंसी है,
वही मेरा कान्हा है, वही मेरा किशोर है,
बांकी अदा तिरछी नज़र,जादू का ये शोर है,
सांवरा सलोना मेरा, चितचोर किशोर है,
जय हो…
सांवरा सलोना मेरा, चितचोर किशोर है।

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काम धाम सब छोड़ के, सखियाँ दौड़ी आतीं हैं,
सांवरे की प्रीति में, वो बावरी हो जाती है,
एक कृष्ण हजार गोपियाँ, अद्भुत ये खेल निराला,
हर सखी को लगे, उसके संग है नंदलाला,
प्रेम की रीत सीखा गया, वो कुञ्ज बिहारी,
वृन्दावन की गलियों में, बजती जो बंसी है,
वही मेरा कान्हा है, वही मेरा किशोर है,
बांकी अदा तिरछी नज़र, जादू का ये शोर है,
सांवरा सलोना मेरा, चितचोर किशोर है
जय हो…
सांवरा सलोना मेरा, चितचोर किशोर है।

कलिदा की जल में, फ़न पे जो नाचता,
कालिया की विष को भी, जो अमृत में बदलता,
उंगली पे गोवर्धन को, जिसने उठाया है,
इन्द्र की घमंड को, पल में मिटाया है,
भक्तों का रक्षक है वो , चक्रधारी,
वृन्दावन की गलियों में, बजती जो बंसी है,
वही मेरा कान्हा है, वही मेरा किशोर है,
बांकी अदा तिरछी नज़र, जादू का ये शोर है,
सांवरा सलोना मेरा, चितचोर किशोर है,
जय हो…
सांवरा सलोना मेरा, चितचोर किशोर है।

राधा की जो सांस है, वही कृष्ण की धुन है,
बिना राधा के कहाँ, पूरा ये शुकुन है,
एक प्राण और दो दिल, प्रेम की परिभाषा,
हर भक्त के मन की, यही है अभिलाषा,
राधे कृष्ण कह के, पुकारे दुनिया सारी,
वृन्दावन की गलियों में, बजती जो बंसी है,
वही मेरा कान्हा है, वही मेरा किशोर है,
बांकी अदा तिरछी नज़र, जादू का ये शोर है,
सांवरा सलोना मेरा, चितचोर किशोर है,
जय हो…
सांवरा सलोना मेरा, चितचोर किशोर है।


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