राम से मिलन की तू लगन करले
राम से मिलन की तू लगन करले
प्राणि थोडा थोडा
हरि का भजन करले
राम से मिलन की तू लगन करले
प्राणि थोडा थोडा
हरि का भजन करले।।
माला जपे से ना
हरि को कभी पाएगा।।
मन से पुकारेगो तो
दौड़ा चला आएगा।।
सर को झुका के वंदन करले
रोज थोडा थोडा
हरि का भजन करले।।
प्राणि थोडा थोडा
हरि का भजन करले।।
संतो की वाणी
गंगा ज्ञान की बढाती है।।
चौरासी योनियो से
मुक्ति वो दिलाती है।।
राम नाम का तू
श्रवण करले रे
प्राणि थोडा थोडा
हरि का भजन करले।।
राम नाम अनमोल रतन है
जिसने लिया ना हुआ उसका पतन है
बेनाम तन मन अर्पण करले रे
प्राणि थोडा थोडा
हरि का भजन करले।।
राम से मिलन की तू लगन करले
प्राणि थोडा थोडा
हरि का भजन करले।।

