राम ही प्यास रे
राम ही प्यास रे,
मेरे मन को राम ही प्यास,
कस्तूरी सा भटके हिरना,
राम है अपने पास,
राम ही प्यास रे।
घट घट में वो अलख विराजे, वाह रे झूठा शोर,
पकड़ ले बन्दे नाम की डोरी, खींचे अपने ओर,
खरा समुन्दर पीकर देखा, प्यास बुझी ना कोये,
राम नाम का एक कतरा ही जीवन पावन होय।
राम ही प्यास रे,
मेरे मन को राम ही प्यास,
कस्तूरी सा भटके हिरना,
राम है अपने पास।
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रेत कटीला ये जग सारा, चमक रही मृग माया,
प्यास लगी जब रूह को मेरी, राम नाम सुख पाया,
पाँव जले तो जलने देना, मंजिल दूर नहीं है,
जिसके भीतर राम बसे, उसे कोई फिक्र नहीं है।
ओ ओ ओ ओ…
ओ ओ ओ ओ…
मैला दर्पण लेकर घूमे, दिखे ना राम की सूरत,
मन की मेल जो धो ले बन्दा, वही सबसे ख़ूबसूरत,
ना मैं ऊँचा ना मैं नीचा, मैं तो धूल बराबर,
राम नाम की ओढ़ के चादर, हो गया मैं भी अमर,
लकड़ी का ये एक तारा भी, राम नाम हीं बोले,
एक ही सुर में जग ये सारा, राम के द्वारे डोले,
अब तो बस दीदार तुम्हारा बाकी सबकुछ वारुं,
तेरी भक्ति की नैया पर ही अपना जन्म उतारूं,
ओ मेरा रामा, राम ही प्यास,
ओ मेरा राम, राम ही प्यास,
प्यास बुझा दे-०२
मेरे राम, ओ मेरे राम,
राम ही प्यास रे,
मेरे मन को राम ही प्यास,
मेरे राम, ओ मेरे राम।
राम…
राम…

