रही बक्श्दा तू किते होए कसूर

  • rahi bakshda tu kite hoye kasoor

रही बक्श्दा तू किते होए कसूर मालका,
सहनु चरना तो करी न तू दूर मालका,

भावे मने या न मने साड़ी गल कोई वी,
भावे करे न मुश्किला दा हल कोई वी,
हाल दिल दा सुनावागे जरुर मालका,
सहनु चरना तो करी न तू दूर मालका,
रही बक्श्दा तू किते होए कसूर मालका….

बचिया लाई हर भूल भूल जानी चाह्दी,
शान वडिया नु वडी दिखानी चाहीदी,
दुःख दुखियां दे करे चूर चूर मालका,
सहनु चरना तो करी न तू दूर मालका,
रही बक्श्दा तू किते होए कसूर मालका…

एक पासे शान तेरी एक पासे एब मेरे,
एक पासे नूर तेरा एक पासे हनेरे,
तू ही दस कौन ज्यदा है मशहुर मलका,
सहनु चरना तो करी न तू दूर मालका,

एक तेरे ही भरोसे हर कम करी दा,
भाव सागरा दे विच वी ना डर थरी दा,
तू ही मंच तू ही साहिल दा नूर मलाका,
सहनु चरना तो करी न तू दूर मालका,

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