रघुनंदन का अभिनंदन है
रघुनंदन का अभिनंदन है
मेघ पुष्प बरसा दो धरती अंबर महकदो
कोई राम लला के सर से अब त्रिपल हटादो
आई है शुभ घड़ी
आब तो मरुत गाओ वंदन
आ रहे महलो में मेरे रघुनंदन।।
मां सरयू मंगल गाओ
सब मिलके खुशियां मनाओ
रोशन करो अवध नगरिया
अवध पुरी को नज़र ना लागे लगा दो अंजन
आ रहे महलो में मेरे रघुनंदन।।
मां सिया को साथ में लेके
और धनुष भी हाथ में लेके।।
संग में है प्यारे लखन जी
दो भाई है एक प्राण हो जैसे
आ रहे महलो में मेरे रघुनंदन।।
मेघ पुष्प बरसा दो धरती अंबर महकदो
कोई राम लला के सर से अब त्रिपल हटादो
आई है शुभ घड़ी हे मारुत गाओ वंदन
आ रहे महलो में मेरे रघुनंदन।।
