ओ बंसी वाले बंसी बजा तुझे हम सब बुलाते हैं
ओ बंसी वाले बंसी बजा
तुझे हम सब बुलाते हैं आ
तू आके रस रचा।।
ओ बंसी वाले बंसी बजा
तुझे हम सब बुलाते हैं आ
तू आके रस रचा
ओ बंसी वाले बंसी बजा।।
तेरे बिन मुझको लगता था ऐसा
जैसे मैं हो गई अकेली
कितने दिनों से देखी नहीं थी
आंखों ने तेरी हवेली।।
मैने सच्चे मन से सच्ची लगन से
पूजा की सजा है थाली।।
ओ बंसी वाले बंसी बजा
तुझे हम सब बुलाते हैं आ
तू आके रस रचा
ओ तेरी बंसी में ओ मेह किंकिन
जैसे त्रिभुवन बसा है।।
पर ये बताउ क्यो
गोवर्धन का पर्वत ही
अच्छा लगता है
चिपली है मूरत दिखती है सूरत
लगे फिर भी कान्हा निराला।।
ओ बंसी वाले बंसी बजा
तुझे हम सब बुलाते हैं आ
तू आके रस रचा।।



