नटवर नागर रास रसिकवार राधा देख लुभानी
नटवर नागर रास रसिकवार
राधा देख लुभानी।।
नटवर नागर रास रसिकवार
राधा देख लुभानी।।
पुलक पुलक अंग मगन श्याम रंग
छवि की छत्ता सुहानी
राधा देख लुभानी
नटवर नागर।।
राधा रूप हेरी हर केहिया
जागे मदन हिलोर।।
पूरन चंद्र किरण में उमागी
सागर तरंग किलोय
राधा देख लुभानी
नटवर नागर।।
रहस रहस हरि आलिंगन में
डोले उर्र को हार
यमुना के नीलम जल उपर
उजली फेन फुहार
राधा देख लुभानी
नटवर नागर।।
चंचल मुख चल
तरण नयन में
जागी मदन तरंग में
कंजलयुगल शरद पंकज पार
खेलति लालति उमंग।।
राधा देख लुभानी
नटवर नागर रास रसिकवार
राधा देख लुभानी।।

