मुझे अपना बना लो राम
मोह के जाल में उलझा हुआ,
पथ भटकता मैं अकेला हुआ,
हर दिशा में अँधेरा, हर कदम पर सन्नाटा,
हे राम ! तुम बिन जीवन है प्यासा,
मेरे मन की पुकार सुनों, मेरे अश्रु की धार चुनों,
मुझे अपना बना लो राम, मेरे जीवन का हो तुम धाम,
हर सांस तुम्हें पुकारे, हर दिल तुम्हारा नाम।
मिट्टी सा बिखरा धूल में खोया,
प्रभु बिना तुम सबकुछ है धोखा,
चरणों की छाया, अमृत सामान,
तुम हो सत्य शेष सब है स्वप्न,
मेरे अंतर का द्वार खोलो,
मेरे भटके कदम सम्भालो,
मुझे अपना बना लो राम, मेरे जीवन का हो तुम धाम,
हर सांस तुम्हें पुकारे, हर दिल तुम्हारा नाम।
और इस भजन का भी अवलोकन करें: हमारे साथ श्री रघुनाथ तो किस बात की चिंता
मोह के जाल में उलझा हुआ,
पथ भटकता मैं अकेला हुआ,
हर दिशा में अँधेरा, हर कदम पर सन्नाटा,
हे राम ! तुम बिन जीवन है प्यासा,
मेरे मन की पुकार सुनों, मेरे अश्रु की धार चुनों,
मुझे अपना बना लो राम, मेरे जीवन का हो तुम धाम,
हर सांस तुम्हें पुकारे, हर दिल तुम्हारा नाम।
मिट्टी सा बिखरा धूल में खोया,
प्रभु बिना तुम सबकुछ है धोखा,
चरणों की छाया, अमृत सामान,
तुम हो सत्य शेष सब है स्वप्न,
मेरे अंतर का द्वार खोलो,
मेरे भटके कदम सम्भालो,
मुझे अपना बना लो राम, मेरे जीवन का हो तुम धाम,
हर सांस तुम्हें पुकारे, हर दिल तुम्हारा नाम।
