मोरे कान्हा जो आए पलट के अब के होली मैं खेलूँगी डट के
मत जा रे वृषभानु
की किशोरी छैल
होली में तासे काहु
भाति नही हारेगी।।
लाल तोहे पकड़ नचावे
गाल गुलचा लगावे
तोहे राधिका बानावे
आप कृष्णा बन जावेगी।।
दंपत किशोर
शोर भयो है जहाँ बीच
आज बस ना चलेगो
ऐसी कसक निकारेगी।।
आवत ब्रज बाल
भाग जाओ रे गोपाल लाल
देखत ही लाल
तोहे लाल कर डारूंगी।।
मोरे कान्हा जो आए पलट के
अब के होली मैं खेलूँगी डट के।।
मोरे कान्हा जो आए पलट के
अब के होली मैं खेलूँगी डाट के
उनके पीछे मैं चुपके से जा के
ये गुलाल अपने तन से लगा के
रंग दूँगी उन्हे भी लिपट के।।
मोरे कान्हा जो आए पलट के
अब के होली मैं खेलूँगी डट के।।
की जो उन्होने अगर जोरा ज़ोरी
छीन पिचकारी बाइया मरोरी।।
गलिया मैने रखी है रट के
गलिया मैने रखी है रट के।।
मोरे कान्हा जो आए पलट के
अब के होली मैं खेलूँगी डट के।।
