मेरी चिंता हरि करे मोहे ना चिंता होय
चिंता ऐसी डाकिनी, काट कलेजा खाय,
वैद्य बेचारा क्या करे, कहाँ तक दवा लगाय,
रातों की नींद गयी, दिन का चैन भी खाय,
वैद्य बेचारा क्या करे, कहाँ तक दवा लगाय,
चिंता ऐसी डाकिनी, काट कलेजा खाय,
वैद्य बेचारा क्या करे, कहाँ तक दवा लगाय।
चिंता से चतुराई घटे, दुःख से घटे शरीर,
लोभ किये धन घटे, कह गये दास कबीर,
चिंता से चतुराई घटे, दुःख से घटे शरीर,
लोभ किये धन घटे, कह गये दास कबीर,
सोचते सोचते इंसान, खुद को हीं खा जाय,
वैद्य बेचारा क्या करे, कहाँ तक दवा लगाय।
चिंता खा गयी जगत को, चिंता जग की पीर,
जो चिंता से तार दे, उसका नाम कबीर,
चिंता खा गयी जगत को, चिंता जग की पीर,
जो चिंता से तार दे, उसका नाम कबीर,
कैसे ये दुःख जाय, कबीर बताये उपाय,
वैद्य बेचारा क्या करे, कहाँ तक दवा लगाय।
और इसे भी देखें: यही तो भजन है
दुःख में सुमिरन सब करे, सुख में करे ना कोय,
जो सुख में सुमिरन करे, दुःख काहे को होय,
दुःख में सुमिरन सब करे, सुख में करे ना कोय,
जो सुख में सुमिरन करे, दुःख काहे को होय,
सुख में भूल गया सब, दुःख में याद आय,
वैद्य बेचारा क्या करे, कहाँ तक दवा लगाय। ।
कबीर चिंता क्या करे, चिंता से क्या होय,
तेरी चिंता हरि करे, चिंता तोहिं ना कोय,
कबीरा चिंता क्या करे, चिंता से क्या होय,
तेरी चिंता हरि करे, चिंता तोहिं ना कोय,
कबीर क्यों चिंता करे, जब हरि साथ खड़े,
तेरी चिंता हरि करे, चिंता तोहिं ना कोय,
रख भरोसा राम का, ताहि ना दूजा कोय,
जो कछु लिखा ललाट में, सोइ निश्चय होय,
रख भरोसा राम का, ताहि ना दूजा कोय,,
जो कछु लिखा ललाट में, सोइ निश्चय होय,
रख भरोसा राम का, ताहि ना दूजा कोय,,
जो कछु लिखा ललाट में, सोइ निश्चय होय,
जिसके दिल में राम है, उसको क्या डर होय,
जो होय अच्छा होय, हरि इच्छा से होय,
चिंता ऐसी डाकिनी, काट कलेजा खाय,
वैद्य बेचारा क्या करे, कहाँ तक दवा लगाय,
रातों की नींद गयी, दिन का चैन भी खाय,
वैद्य बेचारा क्या करे, कहाँ तक दवा लगे।
