मेरा गरीब खाना तुमको बुला रहा है दो पल ही माँ आ जाओ
मेरी अर्जी ना ठुकराना ना
और मुझे तरसाना
कभी आ भी जा घर मेरे
मेरा कोई सिवाए ना तेरे
मेरा गरीब खाना तुमको बुला रहा है
दो पल ही माँ आ जाओ तुमको आगर हो फुर्सत
ये भगत तेरी राह में पलकें बिछा रहा है
मेरा गरीब खाना तुमको बुला रहा है
मां हो के बचपन से तुम यूं दूर कैसे हो गई
दुनिया की तुम हो मलिक मजबूर कैसे हो गई
अनमोल नेमटन से सबको ही भर दिया है
हम बदनसिबो से मां मुंह फेर क्यों लिया है
मयूस जिंदगी है सर पे मां हाथ रख दो
देखो ये लाल तेरा अंशो बहा रहा है
मेरा गरीब खाना तुमको बुला रहा है
पत्थरों में रहकर दिल
क्यों पत्थर सा कर दिया है
इस लड़ले का जीवन कांटो से भर दिया है
रस्ते में अब न रुकना कहीं डर हो ना जाए
तेरी डेर से याहा पर अंधेर हो ना जाए
दुनिया की बेरूखी का क्यों कर गिला करो
अपना नसीब जब मन नज़र चुरा रहा है
मेरा गरीब खाना माँ तुमको बुला रहा है
ये वक्त बेवफा है जिसको है साथ छोटा
अब तुम को क्या कहूं मां तुम ने भी हाथ छोटा
ममता की तुम हो देवी कुछ तो ख्याल कार्तिक
मेरा कोई तो मैय्या पुरा सावल कार्तिक
तुम रहम की हो गंगा कैसे ये मानलू मैं
तेरे होते जग ये मुझपे
बड़े ज़म धह रहा है
मेरा गरीब खाना माँ
तुमको बुला रहा है
दो पल ही माँ आओ तुमको
आगर हो फुरसातो
ये भक्त तेरी राह में
पलक बिच्छा रहा है
मेरा गरीब खाना माँ
तुमको बुला रहा है
कुल दुनिया की तुम मां हो
फिर मेरी बार कहां हो
आ दुख में अपना रो लूं
आशको से तेरे पग धो लू मां
मेरा गरीब खाना माँ
तुमको बुला रहा है

