मना चल कटड़े नू चलिए

  • mana chal Katre nu chaliye

धुन – मना चल वृंदावन चलीए

मना चल कट्टड़े नू चलीए,
जिट्थे रहिंदी ए शेरां वाली माँ,
जिट्थे रहिंदी ए मेहऱां वाली माँ,
मना चल चल चल,
मना चल कट्टड़े नू चलीए…

जिट्थे ऊँचे पहाड़ पए दिसदे,
जिट्थे भवन सुनहरी पए दिसदे,
तूँ वी चढ़ के चढ़ाइयां जा।
जय माता दी करदा जा।
मना चल चल चल,
मना चल कट्टड़े नू चलीए…

जिट्थे बाण गंगा ठाठां पई मारदी,
जेहड़ी भगतां दे दिल दे नूं ठार्हदी,
तूँ वी रज्ज रज्ज चुभियां लाँ।
तूँ वी मन दी मेल हटा।
मना चल चल चल,
मना चल कट्टड़े नू चलीए…

माँ दी मूर्ति नूं मन च वसा के,
चढ़ जा तूं चढ़ाइयां जा के,
माँ दी जय जयकार बुला।
ओहदियां ऊँची ऊँची भेटां गा।
मना चल चल चल,
मना चल कट्टड़े नू चलीए…

अग्गे आ गई आदि कुवारी ए,
जिट्थे बैठी मैया प्यारी ए,
तूँ वी गुफ़ा दे विचों लंघ जा।
गेढ़ चौरासी दा अपना मुँका।
मना चल चल चल,
मना चल कट्टड़े नू चलीए…

अग्गे हाथी माथा प्यां ऑंवदा,
माँ दे चरणां च सीस नूं झुकांवदा,
तूँ वी सांझी छत ते जा।
माँ दे ऊँची ऊँची जैकारे ला।
मना चल चल चल,
मना चल कट्टड़े नू चलीए…

माँ दे भवनां दी ऊँची ऊँची पौड़ियां,
जिट्थे मिलदियां लालां दीआँ जोड़ियां,
माँ दे दर ते तूं झोली फैलां।
मूँहों मंगियां मुरादां ओथों पा।
मना चल चल चल,
मना चल कट्टड़े नू चलीए…

माँ ने पिंडी रूप बना लिया,
माँ ने कँज़कां दा रूप वी धारिया,
तूँ वी पिंडियां दे दर्शन पा।
ओथे जा के तूं कँज़कां मना।
मना चल चल चल,
मना चल कट्टड़े नू चलीए…

जिट्थे भगत दहलीज़ां मल्लियां,
माँ दे दर उत्ते हाज़्रियां भरियां,
तूँ वी जा के अर्जी सुना।
माँ दा रज्ज रज्ज दर्शन पा।
मना चल चल चल,
मना चल कट्टड़े नू चलीए…

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