मन में जब फूल भक्ति के खिल जाएँगे राम मिल जाएँगे

  • Man Me Jab Phool Bhakti Ke Khil Jayenge Ram Mil Jayenge

मन में जब फूल भक्ति के खिल जाएँगे
राम मिल जाएँगे राम मिल जाएँगे।।

हे राम राम राम हे राम राम राम
राम हे राम हे राम हे राम हे
राम हे राम हे राम हे राम हे।।

मन में जब फूल भक्ति के खिल जाएँगे
राम मिल जाएँगे राम मिल जाएँगे ॥

हे राम राम राम हे राम राम राम
राम हे राम हे राम हे राम हे
राम हे राम हे राम हे राम हे ॥

मन में जब फूल भक्ति के खिल जाएँगे
राम मिल जाएँगे राम मिल जाएँगे ॥

तू बुला भाव से वो चले आएँगे
राम मिल जाएँगे राम मिल जाएँगे ॥

उनके आगे तू अपना समर्पण तो कर
फूल श्रद्धा के चरनो में अर्पण तो कर
वो कृपा मेघ तुझपे यू बरसाएँगे
राम मिल जाएँगे राम मिल जाएँगे ॥

जो मिले राम वो काम करतो सही
भाव भक्ति तू ह्रदय में भर तो सही
वो दयावान दर्शन भी दिखलाएँगे
राम मिल जाएँगे राम मिल जाएँगे ॥

उसके पाने को सच्ची लगन चाहिए
साफ़ सुंदर सरल एक मन चाहिए
जिस घड़ी मैल मन के निकल जाएँगे
राम मिल जाएँगे राम मिल जाएँगे ॥

ध्यान पूजा का निश्चित नियम नें हो
भाव निश्छल हो सबरी सा जो प्रेम हो
बेर भी तुम खिलौगे वो खाएँगे
राम मिल जाएँगे राम मिल जाएँगे ॥

तेरे अंदर ना तिल भर अहंकार हो
हर किसी के लिए प्यार ही प्यार हो
फिर भला कैसे वो तुझको बिसराएँगे
राम मिल जाएँगे राम मिल जाएँगे ॥

तू नमन अपने सर को झुकाकर तो कर
उसकी रहो में खुद को न्योछावर तो कर
तेरी पीड़ा से ईष्ट अकुलाएँगे
राम मिल जाएँगे राम मिल जाएँगे ॥

बस अटल विश्वश हो फिर क्या डर
दास केवट सी अरदास हो फिर क्या डर
तुझसे भी अपने चरनो को ढूलवाएँगे
राम मिल जाएँगे राम मिल जाएँगे ॥

भक्त बनकर तो देखो हनुमान से
खेल जाए जो हंस कर यू ही जान से
फिर तो हरदे में आकर वो बस जाएँगे
राम मिल जाएँगे राम मिल जाएँगे ॥

पार भाव से अगर अब उतरना है सुन
मैली चादर को भी सॉफ करना है सुन
दाग चादर के जिस रोज धूल जाएँगे
राम मिल जाएँगे राम मिल जाएँगे ॥

राम हे राम हे राम हे राम हे
राम हे राम हे राम हे राम हे ॥

मन में जब फूल भक्ति के खिल जाएँगे
राम मिल जाएँगे राम मिल जाएँगे ॥

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