मन के मंदिर में माधव मुरारी हम तुमको बिठा के रहेंगे
मन के मंदिर में माधव मुरारी, हम तुमको बिठा के रहेंगे-०२
पांव की धूल कान्हा मुरारी, अपने मस्तक लगाकर रहेंगे-०२
मन के मंदिर में माधव मुरारी, हम तुमको बिठा के रहेंगे-०२
हार माली ने तुम्हें पहनाया, और तुलसी को मस्तक सजाया-०२
जैसे मीरा ने तुमको रिझाया, वैसे हम भी रिझा के रहेंगे-०२
मन के मंदिर में माधव मुरारी, हम तुमको बिठा के रहेंगे-०२
और इस भजन को भी देखें : पकड़ लों हाथ बनवारी, नहीं तो डूब जाएंगे
बिधुर घर छिलके भी खाये, और सुदामा के चन्दुल चबाये-०२
बेर सबरी ने जैसे खिलाये, वैसे हम भी खिला के रहेंगे-०२
मन के मंदिर में माधव मुरारी, हम तुमको बिठा के रहेंगे-०२
नृत्य सखियों को तुमने दिखाया, रास ब्रिज में कन्हैया रचाया-०२
जैसे भक्तों को तुमने नचाया, वैसे तुमको नचाते रहेंगे-०२
मन के मंदिर में माधव मुरारी, हम तुमको बिठा के रहेंगे-०२

