मैं ना ना करती हार गई रंग डार गयो
मैं ना-ना करती हार गई, रंग डार गयो,
हो, मैं ना-ना करती हार गई, रंग डार गयो।
रंगीलो रंग डार गयो, छबीलो रंग डार गयो,
रंगीलो रंग डार गयो, छबीलो रंग डार गयो।
मैं ना-ना, ना जी ना-ना…
मैं ना-ना करती हार गई, रंग डार गयो।
री नंद का लाला, ब्रज का वो नटखट पाला,
रंग-रंग डाल गयो, रंग-रंग डाल गयो।
बांके बिहारी नंद का लाला, ब्रज का वो नटखट ग्वाला,
रंग-रंग डार गयो, रंग-रंग डार गयो।
आयो अचानक आंगन में मोरे,
मोरी नरम कलइयां मरोड़े।
मैं विनती कर-कर हार गई, रंग डार गयो,
मैं ना-ना करती हार गई, रंग डार गयो।
हाथ जोड़ मैंने विनती कीन्ही,
उसने चुनरिया मोरी छीनी।
हाथ जोड़ मैंने विनती कीन्ही,
उसने चुनरिया मोरी छीनी।
फिर छलिया सों मैं हार गई, रंग डार गयो,
ओ, मैं ना-ना करती हार गई, रंग डार गयो।
“पकड़ूं कलइयां, रंग दूं चुनरिया,
पकड़ूं कलइयां, रंग दूं चुनरिया।
होली ना खेलूं तो काहे का सावरिया?
होली ना खेलूं तो काहे का सावरिया?
ले लूं सारे रंग तेरे, भर दूं श्याम रंग मेरे,
होली खेलूं मैं आज तेरे संग!”
तू ना-ना, तू ना-ना…
तू ना-ना करती हार गई, मैं सब वार गया,
तू ना-ना करती हार गई, मैं सब वार गया।
हाय, मैं रंग डार गया, हाय, मैं रंग डार गया!

