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माँ क्या याद मेरी आती नहीं

  • Maa Kya Yaad Meri Aati Nahin

कब आओगी घर मेरे बताओ ना अम्बे माँ सताओ ना अम्बे माँ, क्या याद मेरी आती नहीं-०२
क्या याद मेरी आती नहीं-०२

है झूठ ये जग कहता, जिसे रिश्ते और नाते,
जब दिन बुरे आये तो, छोड़ अपने भी जाते,
एक तुहीं है माँ, राहों से चुन लेती हैं कांटे,
आँचल तले मैया तेरे, सुख चैन हैं पाते,
तुम मीठी लोरी गा के सुलाओ ना अम्बे माँ,
क्या याद मेरी आती नहीं-०३

है बदनसीब वो, जिसे तेरा प्यार ना मिले,
सावन में भी मन गुलशन को, बहार ना मिले,
धन लाख कमा ले, सुख और करार ना मिले,
हो कोई मुसीबत तो, मददगार ना मिले,
ऐसे परिस्थिति से बचाओ ना अम्बे माँ,
क्या याद मेरी आती नहीं-०३

तुम माँ बहन बेटी हो, और तुम हीं सहेली,
हर हाल में संग रहना, कभी छोड़ना ना अकेली,
मैं तेरी हूँ भगतन मैया, एक दुखिया अभागन,
बिन चाँद के सूना, मेरा जीवन का है आँगन,
बन चांदनी मन में मेरे छा जाओ अम्बे माँ, क्या याद मेरी आती नहीं,
क्या याद मेरी आती नहीं माँ, क्या याद मेरी आती नहीं।

और इसे भी देखें: बंधे हैं तुझसे मेरी रूह के धागे

जाना पड़े हमें छोड़, जहाँ बीता था बचपन,
एक रीत यहाँ बन गयी, बेटी पराया धन,
पर तुम निभाना, अपनी बिटिया से सदा प्रीत,
चरणों में तेरे हंस के, मेरे जाए उमर बीत,
इस रिश्ते को अटूट बना जाओ अम्बे माँ, क्या याद मेरी आती नहीं,
कब आओगी घर मेरे बताओ ना अम्बे माँ सताओ ना अम्बे माँ, क्या याद मेरी आती नहीं,
क्या याद मेरी आती नहीं-०३


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