ले चल वृन्दावन
श्याम के बिना कोई काम हीं नहीं है-०२
ले चल वृन्दावन ओ मन, लागे नहीं तुम बिन मन,
हाय ले चल वृन्दावन मोहन, लागे नहीं तुम बिन मन,
श्याम के बिना कोई काम हीं नहीं है,
ले चल वृन्दावन मोहन, ले चल वृन्दावन।
हाथ पकड़ लो, मैं हूँ अकेला,
मुझको ना भाये कांधा, दुनिया का मेला,
मैं हूँ तेरे द्वार का भिखारी, विनती सुन लो हे बनवारी,
मुझपे मेरा कोई जोर हीं नहीं है-०२
ले चल वृन्दावन मोहन, लागे नहीं तुम बिन मन।
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जहाँ ले चलोगे, वहीं मैं चलूँगा,
जैसा कहोगे, वैसा करूँगा,
तेरी हीं मूरत, बसी है नयन में,
मुझको जगह दो अपनी चरण में,
सारे रिश्ते नाते किसी काम के नहीं है-०२
ले चल वृन्दावन मेरे मन, लागे नहीं तुम बिन मन मोहन,
ले चल वृन्दावन ओ मन, लागे नहीं तुम बिन मन।

