लक्ष्मी संग बैठे नारायण
क्षीरसागर की छाया में, दिव्य प्रकाश सुहाना,
लक्ष्मी संग बैठे नारायण, लगता रूप निराला।
ओ ओ ओ ओ
लक्ष्मी संग बैठे नारायण, दिव्य लगे ये जोड़ी,
एक हैं करुणा के सागर, एक कृपा की डोरी।
कमल आसान पर माँ विराजे, पीताम्बर श्री हरी धारे,
एक तरफ हैं प्रेम की गंगा, एक जग के रखवाले,
लक्ष्मी संग बैठे नारायण।
माता लक्ष्मी संग श्री हरी, भक्तों पर कृपा बरसाए,
जिस घर में दोनों का स्मरण हो, सुख समृद्धि वहां आये,
लक्ष्मी संग बैठे नारायण।
शंख चक्र की शोभा न्यारी, कमल की महिमा प्यारी,
लक्ष्मी जी की मुस्कान संग, महके दुनिया सारी,
लक्ष्मी संग बैठे नारायण।
और इस भजन से भी आनंदित हों: हर घर वैकुण्ठ धाम
बैकुंठ धाम में प्रेम की छाया, दिव्य लगे दरबारा,
लक्ष्मी जी के संग नारायण, जग के पालनहारा,
लक्ष्मी संग बैठे नारायण,
जय श्री हरी, जय महालक्ष्मी,
गूंजे तेरा जयकारा,
लक्ष्मी नारायण की कृपा से महके जग सारा।

