कोई बोले त्रिपुरारी

  • Koi Bole Tripurari

कोई बोले त्रिपुरारी, कोई भोले भंडारी,
कोई बोले गंगधारी, कोई बोले जटाधारी,

कोई बोले त्रिपुरारी, कोई भोले भंडारी,
कोई बोले गंगधारी, कोई बोले जटाधारी,
कोई बोले त्रिपुरारी, कोई भोले भंडारी,
कोई बोले गंगधारी, कोई बोले जटाधारी,
नाम उसके अनेक और काम हैं एक,
उसने किस्मत संवारी, सबकी किस्मत संवारी,
किस्मत संवारी, सबकी किस्मत संवारी,
कोई बोले त्रिपुरारी, कोई भोले भंडारी,
कोई बोले गंगधारी, कोई बोले जटाधारी,
नाम उसके अनेक और काम हैं एक,
उसने किस्मत संवारी, सबकी किस्मत संवारी,
किस्मत संवारी, सबकी किस्मत संवारी।

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भक्ति भाव से अर्पित कर एक लोटा जल,
कर्म हो पावन ना हो मन में कोई छल,
फिर मन की सुनेंगे कुछ अच्छा करेंगे-०२
कर देंगे निहाल जब आएगी बारी,
उसने किस्मत संवारी, सबकी किस्मत संवारी,
किस्मत संवारी, सबकी किस्मत संवारी,
कोई बोले त्रिपुरारी, कोई भोले भंडारी,
कोई बोले गंगधारी, कोई बोले जटाधारी।

भाल पे चमके सुन्दर चंदा चांदी सा,
तन पे लहराए बाघम्बर आंधी सा,
उसकी डमरू की ताल है बड़ी बेमिसाल-०२
गले नाग विरजता वो फ़नकारी,
उसने किस्मत संवारी, सबकी किस्मत संवारी,
किस्मत संवारी, सबकी किस्मत संवारी,
कोई बोले त्रिपुरारी, कोई भोले भंडारी,
कोई बोले गंगधारी, कोई बोले जटाधारी।

नीलकंठ कहलाये जब विषपान किया,
जड़ चेतन सब जीवों का कल्याण किया,
तन रमाये भस्म जब नाचे छम छम-०२
कांपे अम्बर धरा थर थर सारी,
उसने किस्मत संवारी, सबकी किस्मत संवारी,
किस्मत संवारी, सबकी किस्मत संवारी,
कोई बोले त्रिपुरारी, कोई भोले भंडारी,
कोई बोले गंगधारी, कोई बोले जटाधारी,
कोई बोले त्रिपुरारी, कोई भोले भंडारी,
कोई बोले गंगधारी, कोई बोले जटाधारी,
नाम उसके अनेक और काम हैं एक,
उसने किस्मत संवारी, सबकी किस्मत संवारी,
किस्मत संवारी, सबकी किस्मत संवारी,
उसने किस्मत संवारी, सबकी किस्मत संवारी-०६


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