कितनी भक्ति तुझसे है माँ

  • Kitni Bhakti Tujhse Hai Maa

कितनी भक्ति तुझसे है माँ, दिल ने ये मान लिया,
तेरे नाम की रौशनी ने, जीवन पहचान लिया,
साँसों में तू हीं तू, हर पल तुझे जान लिया,
कितनी भक्ति तुझसे है माँ, दिल ने ये मान लिया।

सुनी राहें थके कदम, आँखों में अंधकार,
तेरी ममता बन गयी माँ, जीवन की दीवार,
तेरी गोद में सिर रखकर, हर डर मैंने हार लिया,
तेरे चरणों की धूल को, माथे पर उतर लिया,
कितनी भक्ति तुझसे है माँ, दिल ने ये मान लिया।

टूटे सपनों के शहर में, गूंजी तेरी पुकार,
तेरी नाम की धुन में माँ, मिल गया संसार,
तेरी कृपा की छाया ने, हर जख्म को भर दिया,
डूबती साँसों को तूने, नया सा संचार दिया,
कितनी भक्ति तुझसे है माँ, दिल ने ये मान लिया।

ना मैं योग्य ना पूरा, ना कोई पहचान,
फिर भी तूने अपनाया, बनकर मेरी जान,
तेरे डर की चौखट ने, हर बोझ उतार दिया,
झुकी पलकों ने माँ, तुझको हीं स्वीकार किया,
कितनी भक्ति तुझसे है माँ, दिल ने ये मान लिया।

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सिंह सवारी शक्ति स्वरूपा, तू जग की सरकार,
दुःख हरने वाली सुख भरने वाली, तू हीं पालनहार,
तेरे नाम के जयकारों ने, मन को पवित्र किया,
हर अँधेरी रात में माँ, तूने दीप प्रज्वलित किया,
कितनी भक्ति तुझसे है माँ, दिल ने ये मान लिया।

जब भी टुटा जब भी हारा, तेरा नाम लिया,
हर आंसू की धारा में, तुझको हीं पाया,
तेरे भरोसे जीवन माँ, खुद को मैंने सौंप दिया,
टूटे हुए विश्वाशों को, तूने फिर से जोड़ दिया,
कितनी भक्ति तुझसे है माँ, दिल ने ये मान लिया,
तेरे चरणों में जीवन, मैंने पूरा वार दिया,
साँसों में बस तू हीं तू, ये सच मैंने मान लिया।


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